छंद काव्य की लय और संरचना से संबंधित नियमों का विषय है। छंद में वर्णों या मात्राओं की संख्या, क्रम, यति और लय महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अलग-अलग छंदों के नियम अलग होते हैं, इसलिए उदाहरणों के साथ उनका अभ्यास करना उपयोगी है।
छंद की परिभाषा
कविता में वर्ण या मात्रा की निश्चित व्यवस्था और लय से संबंधित नियमों को छंद कहा जाता है। छंदबद्ध कविता में पंक्तियों की संरचना निर्धारित नियमों के अनुसार होती है।
छंद के कुछ प्रमुख आधार
- वर्ण: छंद में वर्णों की संख्या और क्रम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
- मात्रा: लघु और गुरु ध्वनियों के मान से मात्रा-गणना की जाती है।
- यति: पंक्ति में नियत स्थान पर आने वाला विराम।
- गति/लय: कविता पढ़ने की ताल और प्रवाह।
- तुक: पंक्तियों के अंत में ध्वनियों का मेल; यह सभी छंदों में एक जैसा अनिवार्य नहीं।
छंद के सामान्य प्रकार
मात्रिक छंद
जिसमें मात्राओं की गणना के नियम मुख्य होते हैं। उदाहरण के रूप में दोहा और चौपाई का अध्ययन विद्यालयी हिंदी में किया जाता है।
वर्णिक छंद
जिसमें वर्णों की संख्या, क्रम या गणों के नियम महत्वपूर्ण होते हैं।
मुक्त छंद
जिसमें पारंपरिक छंद की निश्चित मात्रा या वर्ण-व्यवस्था का पालन आवश्यक नहीं होता, लेकिन लय और काव्यात्मक संरचना हो सकती है।
दोहा और चौपाई का परिचय
दोहा और चौपाई हिंदी साहित्य में प्रचलित मात्रिक छंद हैं। इनकी मात्रा-गणना के निश्चित नियम होते हैं; परीक्षा में लिखते समय निर्धारित पाठ्यपुस्तक के नियम और उदाहरणों से गणना का अभ्यास करें।
अभ्यास
- छंद किसे कहते हैं?
- मात्रिक छंद में किसकी गणना प्रमुख होती है?
- यति का क्या अर्थ है?
- मुक्त छंद की एक विशेषता लिखिए।
- दोहा और चौपाई किस प्रकार के छंदों के उदाहरण हैं?
उत्तर देखें
- काव्य में वर्ण/मात्रा और लय की व्यवस्था से संबंधित नियम।
- मात्राओं की।
- नियत स्थान पर विराम।
- पारंपरिक निश्चित मात्रा/वर्ण व्यवस्था अनिवार्य नहीं होती।
- मात्रिक छंद।